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आंत्र शल्य चिकित्सा (Viszeralchirurgie) उदर अंगों के रोगों से संबंधित है। हमारा मुख्य केंद्र बिंदु अत्याधुनिक न्यूनतम आक्रामक और रोबोटिक प्रक्रियाओं के उपयोग से Upper-GI और ग्रासनली शल्य चिकित्सा है।

ग्रासनली के रोग

ग्रासनली (Oesophagus) एक पेशीय खोखला अंग है जो ग्रसनी को आमाशय से जोड़ती है। ग्रासनली के रोग जीवन की गुणवत्ता को काफी प्रभावित कर सकते हैं और अक्सर विशेषज्ञ शल्य उपचार की आवश्यकता होती है।

ग्रासनली का कैंसर (Oesophaguskarzinom)

ग्रासनली का कैंसर सबसे आक्रामक ट्यूमर रोगों में से एक है और इसके लिए त्वरित, बहुविध उपचार आवश्यक है। दो मुख्य प्रकार होते हैं: स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (आमतौर पर ऊपरी और मध्य तिहाई में) और एडेनोकार्सिनोमा (विशेष रूप से निचले तिहाई में, अक्सर दीर्घकालिक रिफ़्लक्स रोग के परिणामस्वरूप)।

उपचार: ग्रासनली का शल्य उच्छेदन (Oesophagektomie) कीमोथेरेपी और/या विकिरण चिकित्सा के साथ उपचार का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। आधुनिक न्यूनतम आक्रामक और रोबोटिक प्रक्रियाएँ कम रिकवरी समय और बेहतर कार्यात्मक परिणामों के साथ अधिक सटीक हस्तक्षेप संभव बनाती हैं।

रिफ़्लक्स रोग (गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ़्लक्स रोग – GERD)

रिफ़्लक्स में अम्लीय आमाशय सामग्री या पित्त द्रव ग्रासनली में वापस बहता है और संवेदनशील श्लेष्मा झिल्ली को नुकसान पहुँचाता है। विशिष्ट लक्षणों में सीने में जलन, छाती में दर्द, पुरानी खाँसी और स्वर भंग शामिल हैं।

उपचार: दवा चिकित्सा के अतिरिक्त, उपचार-प्रतिरोधी मामलों में फंडोप्लिकेशन (आमाशय कोष से आस्तीन निर्माण) द्वारा शल्य उपचार उचित हो सकता है। इसे प्राथमिकता से न्यूनतम आक्रामक या रोबोटिक तरीके से किया जाता है।

Barrett-Oesophagus

Barrett-Oesophagus पुरानी रिफ़्लक्स बीमारी के परिणामस्वरूप विकसित होता है, जिसमें ग्रासनली की श्लेष्मा झिल्ली में परिवर्तन होता है। यह परिवर्तन प्री-कैंसर माना जाता है और ग्रासनली कैंसर के जोखिम को काफी बढ़ाता है।

उपचार: नियमित एंडोस्कोपिक निगरानी अत्यंत आवश्यक है। उच्च श्रेणी के डिसप्लेसिया में एंडोस्कोपिक रिसेक्शन या उन्नत मामलों में ग्रासनली-उच्छेदन (Oesophagektomie) आवश्यक हो सकता है।

अचलासिया (Achalasie)

अचलासिया ग्रासनली का एक गति विकार है जिसमें निचला बंदक पर्याप्त रूप से नहीं खुलता। इससे निगलने में कठिनाई, छाती में दर्द और भोजन का उल्टा आना होता है।

उपचार: हेलर मायोटॉमी (निचले ग्रासनली बंदक पर पेशी का विच्छेदन), जो अक्सर एंटी-रिफ़्लक्स ऑपरेशन के साथ संयुक्त होती है, प्राथमिकता से रोबोटिक तरीके से की जाती है और उत्कृष्ट दीर्घकालिक परिणाम प्रदान करती है।

मध्यपट हर्निया (Hiatushernie)

मध्यपट हर्निया तब होता है जब आमाशय के भाग मध्यपट में एक कमज़ोर स्थान से वक्ष गुहा में खिसक जाते हैं। इससे रिफ़्लक्स, निगलने में कठिनाई और गंभीर मामलों में जीवन-घातक जटिलताएँ हो सकती हैं।

उपचार: शल्य उपचार में आमाशय की पुनःस्थापना और मध्यपट छिद्र का बंद करना शामिल है, अक्सर जाली प्रत्यारोपण के साथ। न्यूनतम आक्रामक और रोबोटिक तकनीकें कम जटिलता दर के साथ सटीक पुनर्निर्माण संभव बनाती हैं।

बृहदान्त्र और मलाशय कैंसर (कोलोरेक्टल कार्सिनोमा)

बृहदान्त्र और मलाशय कैंसर पश्चिमी देशों में सबसे आम कैंसर रोगों में से हैं। नियमित निवारक जाँच (कोलोनोस्कोपी) द्वारा रोग का शीघ्र पता लगाया जा सकता है और कई मामलों में पूर्व-अवस्थाओं (पॉलीप्स) को हटाकर रोका जा सकता है।

उपचार: चिकित्सा रोग की अवस्था पर निर्भर करती है और इसमें शल्य रिसेक्शन, एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएँ, विकिरण चिकित्सा और आधुनिक प्रणालीगत चिकित्सा शामिल हैं। ट्यूमर के प्रकार, अवस्था और रोगी की स्थिति के अनुसार अनुकूलित व्यक्तिगत उपचार अवधारणाएँ उपचार की संभावनाओं और जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार करती हैं।

बृहदान्त्र का डाइवर्टिकुलर रोग

डाइवर्टिकुला आंत्र दीवार की थैलीनुमा उभार हैं जो विशेष रूप से बाएँ निचले बृहदान्त्र खंड (सिग्मा) में अक्सर होते हैं। इन डाइवर्टिकुला की सूजन (डाइवर्टिकुलाइटिस) काफी तकलीफ़ और जटिलताओं का कारण बन सकती है।

उपचार: चिकित्सा का स्पेक्ट्रम रूढ़िवादी दवा उपचार से लेकर इंटरवेंशनल प्रक्रियाओं तक, बार-बार होने वाले या जटिल मामलों में शल्य आंत्र खंड रिसेक्शन तक फैला हुआ है।

पित्ताशय की पथरी (Cholezystolithiasis)

पित्ताशय की पथरी पित्त द्रव में जमाव से बनती है और तीव्र या पुरानी तकलीफ़ पैदा कर सकती है, जिसमें शूल, सूजन और पीलिया शामिल हैं।

उपचार: लैप्रोस्कोपिक पित्ताशय उच्छेदन (कोलेसिस्टेक्टॉमी) स्वर्ण मानक है और तेज़ रिकवरी के साथ न्यूनतम आक्रामक प्रक्रिया के रूप में की जाती है।

पुरानी सूजन आंत्र रोग (CED)

इस समूह में मॉर्बस क्रोन और कोलाइटिस अल्सरोसा शामिल हैं – पाचन तंत्र के पुराने सूजन रोग। उपचार मुख्य रूप से गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट द्वारा दवाइयों से किया जाता है।

उपचार: संकुचन, फिस्टुला, फोड़े या उपचार-प्रतिरोधी मामलों जैसी जटिलताओं में विशेषज्ञ आंत्र शल्य चिकित्सकों द्वारा शल्य हस्तक्षेप आवश्यक है।

यकृत रोग

यकृत केंद्रीय चयापचय अंग है और महत्वपूर्ण विषहरण कार्य करता है। यकृत पर शल्य प्रक्रियाओं के लिए उच्चतम विशेषज्ञता आवश्यक होती है और ये सौम्य और घातक ट्यूमर, मेटास्टेसिस तथा अन्य संरचनात्मक यकृत रोगों में आवश्यक होती हैं।

उपचार: यकृत रिसेक्शन तेज़ी से न्यूनतम आक्रामक तरीके से किए जा रहे हैं। यकृत की उच्च पुनर्जनन क्षमता व्यापक रिसेक्शन के बाद भी अच्छी पश्चात-शल्य रिकवरी संभव बनाती है।

अग्न्याशय के रोग (Pankreas)

अग्न्याशय कैंसर

अग्न्याशय कैंसर एक विशेष रूप से आक्रामक ट्यूमर रोग है जिसका अक्सर देर से निदान होता है। शीघ्र पहचान पूर्वानुमान के लिए निर्णायक है।

उपचार: अग्न्याशय रिसेक्शन, विशेष रूप से अग्न्याशय शीर्ष के ट्यूमर में व्हिपल ऑपरेशन, एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें अग्न्याशय, ग्रहणी, आमाशय, पित्ताशय और पित्त नलिका के भागों को हटाना शामिल हो सकता है।

पुरानी अग्न्याशय शोथ और पुटी

अग्न्याशय की पुरानी सूजन और पुटी काफी तकलीफ़ और जटिलताओं का कारण बन सकती हैं और चयनित मामलों में शल्य चिकित्सा की आवश्यकता होती है।

हर्निया (उदर भित्ति विदर)

हर्निया उदर भित्ति के कमज़ोर स्थानों से ऊतक (आमतौर पर आंत्र पाश) का उभार है। सबसे सामान्य प्रकार हैं:

  • इंग्वाइनल हर्निया (वंक्षण हर्निया)
  • नाभि हर्निया (अम्बिलिकल हर्निया)
  • ऊरु हर्निया (फीमोरल हर्निया)
  • निशान हर्निया (इंसीज़नल हर्निया) – पूर्ववर्ती ऑपरेशनों के बाद

लक्षण: दृश्य उभार, परिश्रम पर दर्द, कभी-कभी पाचन संबंधी तकलीफ़।

उपचार:

  • ओपन हर्निया मरम्मत: सिलाई बंद करने या जाली प्रत्यारोपण के साथ सीधी पहुँच
  • लैप्रोस्कोपिक/रोबोटिक हर्निया मरम्मत: कम रिकवरी समय, कम दर्द और बेहतर कॉस्मेटिक परिणामों के साथ न्यूनतम आक्रामक

समय पर शल्य उपचार फंसाव (इनकार्सरेशन) या ऊतक मृत्यु (स्ट्रैंगुलेशन) जैसी जटिलताओं को रोकता है।

सभी प्रक्रियाओं को हम प्राथमिकता से न्यूनतम आक्रामक या रोबोट-सहायित तरीके से करते हैं, ताकि आपको तेज़ रिकवरी के साथ कोमल उपचार प्रदान किया जा सके।